Workers Charter of Demands

1. Implement minimum wage of Rs. 25,000 for all workers.
2. Strongly implement the policy of ‘equal pay for equal work’ for all workers including permanent, contract and temporary workers and male and female workers of different categories in both public and private sectors.
3. Take back all anti-worker reforms in labour law by the central government and different state governments immediately. Reform labour law according to the needs of the workers. Make violation of labour law by capitalists non-cognizable offense with penal provision of jail. Extend protection under different labour laws to all workers in all establishments in organized and unorganized sector irrespective of the number of workers employed.
4. Curb the process of privatization and contractualization. Make permanent all contract and other temporary workers working continuously in permanent nature of jobs on those very jobs and ensure job security. Make laws for paid weekly holidays for contract, casual, apprentice workers and all workers of unorganized sector.
5. Establish universal definition of ‘workman’ in all labour laws and recognize contract, casual, trainee and all other temporary workers including all scheme workers – Anganwadi, Mid-day- meal, Asha workers as ‘working Person’ and give them the necessary recognition, minimum wage, rights and facilities.
6. Make the completion of the process registration of unions compulsory under law within 30 days of receipt of application for union registration from workers. Declare all applicant workers and office bearers of proposed union as ‘protected workman’ from the very date of submission of file for union registration. Make appropriate law for recognition of union by the management.
7. Recognize the right to peaceful protest/demonstration near the factory gate and the industrial area as constitutionally given fundamental trade union rights. Prohibit all kinds of unjust interventions of police-administration in legal rights of workers to organize protest, sit-in demonstration, strikes etc.
8. Strictly implement 8-hour working day and make forced overtime a punishable offense under law.
9. Bring all workers universally under appropriate insurance, PF, Pension schemes, including workers of unorganized/informal sector (like agrarian workers, domestic workers, construction workers, MNREGA workers, Anganwadi workers, loading-unloading workers, bidi workers etc) and strengthen ‘welfare board’ for unorganized sector workers. Guarantee shelter, free education
and treatment, safety and other basic facilities for all workers. Make and implement clear and strict laws for the rights of the informal sector workers.
10. Implement strict laws for to protect the rights of piece rate workers regarding minimum rate, basic facilities and safety etc.
11. Make registration of migrant workers coming from different areas and states of the country compulsory and implement strict laws for their safety and other basic facilities.
12. Reserve one-third of employment in each sector for women workers. Make and strongly implement strict laws for safety, maternity benefits and other facilities for women workers. Participation of women workers in the night shifts should be conditional to their approval. Strongly ensure safety of women workers from sexual harassment in workplace.
13. Curb the process of retrenchment, lay-off of workers and lock-out of factories. The government must take initiative for acquisition of closed factories and reopen them and provide ‘subsistence allowance’ to all closed factory workers till the factories are reopened.
14. Implement pension scheme for all at the rate of at least 2/3 of minimum wage or the last drawn wage/salary.
15. Provide dignified employment to all. Make clear and rational definition and understanding of ‘unemployed’. Provide at least Rs. 15,000 per month as ‘unemployment allowance’ to all unemployed.
16. Curb inflation and provide essential items like rice, daal, wheat, sugar, edible oil, gas etc to working masses at a minimum rate through public distribution system.
17. Immediately release the workers of Maruti, Pricol, Graziano and all other jailed workers, the victims of repression by company management and administration. Take back immediately all the dismissed workers terminated by the company management under ’unfair labour practices’.

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इंकलाब जिंदाबाद!
मज़दूर एकता जिंदाबाद!
ठेकाप्रथा का खात्मा व स्थायी सुरक्षित रोजगार, 25,000 रुपये न्यूनतम मज़दूरी, यूनियन के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों के तमाम अधिकारों के लिए

श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी संशोधन, निजीकरण व मज़दूर आन्दोलन पर दमन के खिलाफ

मज़दूर अधिकार संघर्ष रैली
3 मार्च, 2019 दिल्ली, संसद मार्च में शामिल हो!

प्रिय साथियो,

आप जानते हैं कि मज़दूर-मेहनतकश वर्ग ही अपनी मेहनत से देश की सारी धन-दौलत पैदा करता है। मगर देश की मेहनतकश जनता के श्रम का न सम्मान है, न जीवन जीने लायक मज़दूरी है, न ही सुरक्षित व स्थायी रोजगार है। पिछले 5 सालों में मोदी सरकार ने बड़े पूँजीपतियों के हित में श्रम कानूनों में लगातार मज़दूर विरोधी संशोधन किए हैं, जिनके जरिए मज़दूरों द्वारा एक लंबे संघर्ष के बाद हासिल किये गए अधिकारों को छीना जा रहा है – फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (FTE), नीम ट्रेनी के नाम पर स्थायी रोजगार ख़त्म किया जा रहा है, नयी पेंशन योजना के नाम पर मज़दूरों की सामाजिक सुरक्षा ख़त्म की जा रही है, यूनियन अधिकारों पर हमले हो रहे हैं, ‘हायर एंड फायर’ की नीति तेज हो रही है। एक तरफ कृषि का संकट व आधुनिक उद्योग में रोजगार पैदा न होने से बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। दूसरी तरफ जो भी रोजगार मिल रहा है, वो भी ठेका-अस्थायी-असुरक्षित चरित्र का है, जिसमें जबरन ओवरटाइम करना पड़ता है, न कोई सम्मान है और न ही सुरक्षा है, छंटनी की लटकती तलवार के बीच 8-10 हज़ार रुपये की मज़दूरी में जिंदगी गुज़ारना लगभग असंभव है।
दिल्ली के बवाना, वजीरपुर के असंगठित मज़दूरों में, गुड़गांव-ग्रेटर नोएडा-बहुतला के भवन निर्माण में, सफाई के काम में, सिंगरेनी-मेघालय के खदान में, भिलाई स्टील प्लांट में – देश भर में औद्योगिक दुर्घटना और मज़दूरों की मौत आम बात हो चुकी है। शहरी या औद्योगिक इलाकों की बस्तियों में मज़दूर-मेहनतकश आबादी के स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास की बदतर स्थिति है और विकास के नाम पर उन्हें रहने की जगह से भी खदेड़ा जा रहा है। मज़दूर जब भी अपने अधिकारों या यूनियन बनाने के लिए एकजुट होते हैं, मज़दूर आन्दोलन पर सरकार-प्रशासन का दमन तेज हो जाता है। मारुति, प्रिकॉल, ग्रेज़ीयानो, होंडा, डाईकिन, आइसिन, रोडवेज कर्मचारी, आंगनबाड़ी वर्कर, आशा, मिड-डे-मील वर्कर, गारमेन्ट मज़दूरों आदि के संघर्ष में हम बार-बार यह देख सकते हैं।
चुनाव के वक्त बहुत सी रंग-बिरंगी पार्टियाँ वोट मांगने आती हैं, मगर देश की मज़दूर-मेहनतकश जनता के जीवन-जीविका का मुद्दा, वास्तविक समस्या किसी पार्टी के मुद्दे में शामिल नहीं है। भाजपा सरकार स्पष्ट तौर पर मज़दूर विरोधी है व बड़े पूँजीपतियों की सरकार है। कांग्रेस पहले से ही पूँजीपतियों की विश्वसनीय पार्टी रही है। पूँजीपतियों के हित में नव-उदारवादी, निजीकरण, वैश्वीकरण की नीतियों को पिछले कई दशकों से दुनिया भर में लागू किया जा रहा है। देश में सिर्फ भाजपा या कांग्रेस ही नहीं बल्कि अन्य जिस किसी भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल ने केंद्र या राज्य में चुनाव जीतकर सरकार बनाई है, उसने इन्हीं मज़दूर विरोधी नीतियों को लागू किया है। उनसे जुड़ी स्थापित ट्रेड यूनियनों ने भी इन्हीं नीतियों को लागू करवाने में मदद की है और इन नीतियों के खिलाफ ईमानदारी से कोई प्रभावी संघर्ष नहीं किया है।
आज देश में आर्थिक संकट और तेज हो रहा है। बेरोजगारी भयावह रूप ले रही है। पूँजीपति वर्ग मुनाफे के लिए और आक्रामक हो रहा है, साथ ही पूँजीपति वर्ग के हित में भाजपा-आरएसएस के नेतृत्व में फासीवादी हमला तेज हो रहा है। पूँजीवादी शोषण-दमन के खिलाफ मज़दूर आंदोलन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए धर्म के नाम पर मेहनतकश जनता में फूट डालकर घृणा की राजनीति की ओर धकेलने की साजिश बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में जरूरत है कि देश के संघर्षरत मजदूर-मेहनतकश जनता एक होकर सही संघर्ष का रास्ता अपनाएं और हमलावर पूँजीपति वर्ग और सरकार को पीछे धकेल दें।
मज़दूरों ने आज तक जो भी अधिकार हासिल किये हैं, वे संघर्ष करके ही हासिल किये हैं। जमीनी स्तर पर मज़दूर देश भर में अलग-अलग इलाकों में, क्षेत्रों में, प्लांटों में लड़ रहे हैं। मगर यह संघर्ष सिर्फ अलग-अलग इलाकों के, क्षेत्रों के, प्लांटों के स्तर पर लड़ने से कामयाब नहीं होगा। इसलिए देश भर की जुझारू मज़दूर यूनियनों व संगठनों को एकजुट होकर एक प्रभावी आन्दोलन खड़ा करने की पहल लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मज़दूर आंदोलन का नया और जुझारू केन्द्र बनाना होगा। इसी उद्देश्य को लेकर देश के अलग-अलग प्रदेशों के 15 मज़दूर संगठनों ने एकजुट होकर मज़दूर वर्ग के मौजूदा संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए “मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान” (मासा) का गठन किया है, इस प्रक्रिया में देश की अलग अलग जुझारू यूनियनें और संघर्षरत मज़दूर भागीदारी कर रहे हैं।
मासा ने देश के अलग अलग राज्यों में संगठित और असंगठित क्षेत्रों के मज़दूरों के साथ चर्चा-विचार करते हुए 17 सूत्रीय मज़दूर मांगपत्र तैयार किया है, जिसके आधार पर संघर्ष को आगे बढ़ाया जायेगा। आगामी 3 मार्च को इस मज़दूर मांगपत्र को लेकर मासा ने ‘दिल्ली चलो’ का ऐलान किया है। 3 मार्च, 2019 को प्रातः 10 बजे रामलीला मैदान में मज़दूर एकजुट होंगे और संसद तक रैली करेंगे। उस दिन देश भर से आए हजारों मज़दूर संसद के सामने अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करेंगें, जिसमें आप भी भागीदार बनें।
प्रमुख मांगें हैं –
* 25 हज़ार रुपये मासिक न्यूनतम मज़दूरी
* श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी संशोधन पर रोक, मज़दूर हित में श्रम सुधार
* स्थायी-सुरक्षित-सम्मानजनक रोजगार, समान काम का समान वेतन
* यूनियन बनाने, संगठित होने और धरना-प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार को मान्यता
* निजीकरण, ठेकाप्रथा, छंटनी, ले-ऑफ, तालाबंदी, मज़दूर आन्दोलन पर दमन, बस्ती से विस्थापन पर रोक
* आवास, मुफ्त शिक्षा व इलाज, न्यूनतम 15 हज़ार रुपये बेरोजगारी भत्ता, पेंशन व अन्य सामाजिक सुरक्षा
* असंगठित क्षेत्र के मज़दूर, प्रवासी मज़दूर, विभिन्न श्रेणी के अस्थायी मज़दूरों, महिला मज़दूरों के तमाम अधिकार, ग्रामीण खेत मज़दूरों व मनरेगा मज़दूरों, भवन निर्माण मज़दूरों के अधिकारों के लिए आदि-आदि।

आओ साथी, 3 मार्च सुबह 10 बजे रामलीला मैदान, दिल्ली में एकजुट हो! संसद मार्च में हिस्सा लेकर दिल्ली की सड़कों पर मज़दूर वर्ग की ताकत दिखाओ! मज़दूर अधिकारों के संघर्ष को नयी दिशा, नयी उम्मीद दो!

संपर्क: 9873057637, 9540886678, 9953175766
मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा)
मासा की तरफ से संतोष द्वारा दिल्ली से प्रकाशित

MASA Booklet on Min Wages, Contratualization, Labour Law Reform
MASA PARCHA
LIST of Workers Orgs