Long Live the Resistance!

4 July 2018

(one more case remains here, and those on Life Sentence in the original case still remain in Jail) *#FreetheMaruti13*

As part of their struggle since 2011, Maruti workers had put up a resilient 55-day dharna and fast-unto-death outside the then Haryana industries minister Randeep Surjewala (who is now the Congress National Spokesperson) residence in Kaithal, Haryana in Feb-May 2013. An emergent unity of workers and local farmers & unemployed was also emerging in this social assertion by the workers.

A brutal lathicharge and crackdown on thousands gathered in May 2013 was followed by arrests of 111 workers and activist organizers and various jail terms. This is separate and in addition to cases on 147 workers who were jailed for 5 years and more. Absolutely baseless cases ranging from Arms Act to attempt to murder on the police to rioting and breaking of ‘peace’. Even out on bail, a draining legal case on workers and comrades from Haryana, Rajasthan, MP, UP, Bihar, WB followed for 5 years.

While many workers were forced towards the end to give jurmana, 12 comrades from Maruti Suzuki, and from radical working class organisations – Workers Solidarity Centre, Inqlabi Mazdoor Kendra and Jan Sangharsh Manch Haryana – kept on the fight, and were harassed with fines and ‘peshi’ sometimes for 4 days-a-week in the last phase.

Today’s verdict acquitting all accused (tho one more case remains) is a small but significant victory, even as the way in which the Justice system is structured to harass those falsely accused is itself a big punishment. Struggles like these are necessarily fought out relentlessly for years without any spectacle value. We continue to struggle for the release of the Union workers given Life Sentence #FreetheMaruti13

*कैथल कोर्ट द्वारा फर्जी मुक़दमे में मारुति मजदूर व सहयोगी हुए बरी*

अपने हकों की लड़ाई लड़ते हुए हम मारुति मजदूर जब न्याय की गुहार लेकर मार्च 2013 में तत्कालीन उद्योग मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला के पास गए थे तो उसने हमें रोजी रोटी की मांग के बदले लाठी और मुकदमे सौगात में दिए और अपने आका मारुती प्रबन्धन को खुश कर दिया । कैथल में हमने 55 दिनों तक धरना दिया व् 10 दिन अन्नशन भी किया लेकिन मंत्री जी ने हमरी बात सुनने से मना कर दिया फिर हमने जनता की मदद से उनके आवास के घेराव का एलान किया तो कैथल उपयुक्त ने धारा 144 लगा दी। जिसका सहारा लेकर पुलिस ने धरने पर सो रहे 100 से ज्यादा साथियों को उठा लिया और उन पर कब्ज़ा करने, धारा 144 का उलंघन करने, रोड़ जाम करने,जान से मारने की धमकी व् आर्म एक्ट जैसे मुकदमे लगाकर जेल में डाल दिया।

तब से यानि 2013 से अब तक कोर्ट का खेल चलता रहा और न जाने किस तरह से मजदूरों को परेशान किया गया । इन केसों में हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व् बंगाल के साथी शामिल थे और उन्हें कभी महीने में 5 दिन तो कभी सप्ताह में 4 दिन कोर्ट में आना पड़ता था। बेरोजगारी के दौर में जो साथी किसी छोटी मोटी दुकान या शोरूम पर लगे थे उन्हें भी कई बार काम छोड़ना पड़ा । जो साथी दूर की स्टेट से आते थे उनके चार पांच दिन तो आने जाने में ही चले जाते। ऐसे में जज साहब ने कहा कि या तो अपने जुर्म का इकरार करके जुर्माना देकर चले जाओ या केस को प्रतिदिन चलाने के बयान पर साइन करो।

ऐसे में 85 साथी प्रतिदिन न आने की समस्या से निजात पाने के लिए जुर्माना देकर चले गए और क्रन्तिकारी संगठनों के साथियों जिनमे जन संघर्ष मंच हरियाणा, इंक़लाबी मजदूर केंद्र व् मजदूर सहयोग केन्द्र के साथियों के साथ 12 मजदूरों ने ही ट्रायल फेस किया। अंततः झूठे गवाह व् फर्जी मुकदमा कोर्ट के सामने निरस्त हो गया ।

F I R करवाने वाले प्लाट मालिक को पता ही नही था कि उसने कभी कोई F I R करवाई है उसके सादे पेपर पर लिये गये हस्ताक्षर को ही शिकायत का रूप दिया गया और अन्य गवाहों के फर्जी हस्ताक्षर करके गवाह बनाया गया।

आज कोर्ट ने हमें बेशक बरी कर दिया लेकिन ये वास्तव में झूठ की ही जीत हुई क्योकि संघर्ष की मिसाल मारुती मजदूरों को इस कदर परेशान किया गया कि वो संघर्ष से विमुख हो गए और बिना किये जुर्म का भी इकरार कर जुर्माना भरकर केस से निकले। पांच साल की भागदौड़ और दिन भर कोर्ट में बैठना ही एक सजा थी इसलिए बरी होकर भी हमने पांच साल की सजा झेली और इसमें सरकार और उसका तंत्र मजदूरों को संघर्ष से विमुख करने में एक हद तक सफल रहा।

*जो साथी लड़ने वाले हैं वो जिंदगी भर संघर्ष करने को तैयार हैं ।*