पिछले 31 मई की रात को मजदूर संगठन समिति (MSS) के महासचिव का० बच्चा सिंह, एवं केंद्रीय सचिव का० दीपक कुमार को बोकारो पुलिस ने चंदनकियारी थाने के अंतर्गत पर्वतपुर गांव से गिरफ्तार किया, और गैरकानूनी तरीके से 58 घंटे तक उन्हें पुलिस ने अपनी हिरासत में रखा, जब उनकी गिरफ्तारी की बात बाहर निकली ,तो, तमाम न्याय पसंद लोगों ने और संगठनों ने व्यापक पैमाने पर पुलिस की इस कायराना एवं गैरकानूनी कार्यवाई की निंदा की ,नतीजतन दबाव में पुलिस नें उन्हें 3 जून को अदालत के सामने पेश किया।

ज्ञात हो कि मजदूर संगठन समिति को झारखंड सरकार ने पिछले 22 दिसम्बर, 2017 को एक नोटिस जारी कर माओवादियों का फ्रंटल संगठन घोषित करते हुए प्रतिबंधित कर दिया था और ,उसके बाद लगातार उनके कार्यकर्ताओं एवं नेताओं की गिरफ्तारियां भी राज्य में पुलिस द्वारा एक अभियान की तरह चलाया जा रहा है। प्रतिबंध लगाने के बाद अब लगभग 20 कार्यकर्ताओं को ‘मजदूर संगठन समिति’ का सदस्य होने के आरोप में देशद्रोह जैसे केस लगाकर उन्हें जेल में डाला जा चुका है। इसी सिलसिले में इस संगठन का सदस्य न होने के बावजूद दामोदर तुरी जो विस्थापन विरोधी जन विकास आंदोलन संगठन के संयोजक हैं, उन्हें मजदूर संगठन समिति का सदस्य बताते हुए गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया है। बहुत से प्रतिनीधियों, पदाधिकारियों को गिरफ्तार करने के लिए लगातार छापामारी किया जा रहा है। इसके साथ ही, झारखंड में अन्य मजदूर संगठनों पर भी कुछ इसी तरह के आरोप पुलिस ने ,इन दोनों साथियों की गिरफ्तारी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में, लगाए हैं। जिससे कि राज्य की मंशा साफ़ जाहिर होती है, की, और भी संगठनों को प्रतिबंधित करने की साजिश जारी है।

जैसा की आपको पता है की MSS 1989 से एक पंजीकृत ट्रेड यूनियन है , जो कि मज़दूरों के शोषण के खिलाफ एवं उन्हें संगठित करने में लगातार कार्यरत है। पिछले कुछ सालों में झारखंड में हुए जनांदोलनों में MSS नें नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है।यह संगठन कोयला खदान, थर्मल पाॅवर प्रोजेक्ट, फैक्टरी मजदूर, डोली मजदूर और खेत मजदूरों में काम कर रहा था। यह मजदूरों का श्रमजीव अस्पताल चला रहा था। लगभग 30 हजार मजदूर सदस्यता वाले इस संगठन को प्रतिबंधित कर इसके 20 मजदूर साथियों को देशद्रोह के आरोप में जेल में डाल दिया गया है।

मज़दूर संगठनों पर प्रतिबंध और कार्यकर्ताओं एवं नेताओं की गिरफ्तारी , एक गंभीर चिंता का विषय है, जो कि मजदूर आंदोलनों पर एक सीधा हमला है, और कारपोरेट घरानों को श्रम एवं संसाधनों के लूट की खुली छूट का न्योता भी है।देश का संविधान और मजदूर कानून में मजदूरों को और देश के हर नागरिक को मौलिक अधिकार है कि वह खुद को संगठित करे। सरकार के इस नोटिस के आधार पर किसी भी मजदूर संगठन को मनमाने व्याख्या से प्रतिबंधित किया जा सकता है। यह प्रतिबंध हमारे संगठित होने और आवाज मुखर करने का मौलिक अधिकार पर सीधा हमला है । यह मजदूरों से उसकी ताकत को छीन कर पूंजीपतियों को खून चूसने के लिए गुलाम बना देने की तरफ ले जाने का कॉर्पोरेट पोषित षड्यंत्र है |

मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA ) मज़दूर आंदोलनो और संगठनों पर सरकारी दमन और प्रतिबन्ध की भर्त्सना करता है और ‘मजदूर संगठन समिति’ के केन्द्रीय महासचिव बच्चा सिंह, एवं केन्द्रीय सचिव दीपक कुमार समेत तमाम नेताओं-कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए बिना शर्त्त इन सबों की अविलंब रिहाई के साथ-साथ मजदूर संगठन समिति से अविलंब प्रतिबंध हटाने की मांग करता है |

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा)
घटक संगठन :
1. आल इंडिया वर्कर्स कौंसिल
2. बाउरिआ कॉटन मिल संग्रामी श्रमिक यूनियन (प ० बंगाल )
3. हिंदुस्तान मोटर्स संग्रामी श्रमिक कर्मचारी यूनियन (प ० बंगाल )
4. इंडियन सेंटर फॉर ट्रेड यूनियनस (ICTU)
5. इंडियन फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड यूनियनस (IFTU)
6. इंडियन फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड यूनियनस -सर्वहारा
7. इन्किलाबी केंद्र (पंजाब)
8. इन्किलाबी मज़दूर केंद्र
9. जान संघर्ष मंच (हरियाणा)
10. कर्नाटक श्रमिक शक्ति (कर्नाटक)
11. ग्रामीण मज़दूर यूनियन (बिहार )
12. मज़दूर सहयोग केंद्र (गुडगाँव)
13. मज़दूर सहयोग केंद्र (उत्तराखंड)
14. सोशलिस्ट वर्कर्स सेंटर (तमिलनाडु)
15. ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ़ इंडिया (TUCI)