छत्तीसगढ़ लोक स्वातंत्र्य संगठन को समाचार पत्रों से जानकारी मिली है कि 2 मार्च को पंडरीपानी (बस्तर) में एक निजी ऑटोमोबाइल कंपनी की नयी उच्च-तकनीक वाहनों के उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेते हुए, सुकमा के पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने कहा कि, ऐसे नए बड़े-बड़े वाहनों के नीचे शालिनी गेरा और ईशा खंडेलवाल जैसे मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को कुचल देना चाहिए. उन्होंने शोधकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ लोग अपना कुत्ता-बिल्ली घुमाते रहते हैं, और पुलिस पर इलज़ाम लगाते हैं. ऐसा श्री एलेसेला ने, वर्तमान में रायपुर मुख्यालय स्थानांतरित श्री एस.आर.पी. कल्लूरी और बस्तर पुलिस अधीक्षक श्री आर.पी. दाश की उपस्थिति में कहा. इसी कार्यक्रम में SP सुकमा ने मीडिया से कहा कि वह समझे कि यह एक युद्ध है और पुलिस को हत्यारा साबित नहीं करें. बाद में मीडिया द्वारा स्पष्टीकरण मांगने पर श्री एलेसेला ने कहा कि उन्हें अपना कथन याद नहीं है और “वैसे भी बोलने की आज़ादी है”!

हम इस बयान की कड़ी निंदा करते हैं. जिस प्रकार पुलिस और प्रशासन, व्यवस्था को बनाये रखने का अपना कार्य करते हैं; उसी प्रकार न्याय प्रणाली में अधिवक्ता और लोकतान्त्रिक व्यवस्था में पत्रकार और मानव अधिकार कार्यकर्ता भी मानव अधिकार हनन के मामलों में न्याय दिलाने का अपना कार्य करते हैं. इनके कार्यों के बिना लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता. महिला मानव अधिकार कार्यकर्ताओं – सुश्री शालिनी गेरा, ईशा खंडेलवाल और बेला भाटिया के विरुद्ध दिये गये SP सुकमा के बयान से – बस्तर पुलिस का मानवधिकारों के प्रति घोर तिरस्कार और लापरवाही का दृष्टिकोण, कार्यकर्ताओं के प्रति व्यक्तिगत रंजिश, और मतभेद रखने वालों के साथ अपने बल का दुरूपयोग करने की अपराधिक प्रवृति स्पष्ट झलकती है. एक निजी कार्यक्रम को अनावाश्यक रूप से सामाजिक कार्यकर्ताओं को धमकी देने का मंच बनाना पुलिस आचरण के नियमों के विरुद्ध है. आज जब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के समक्ष इन्ही अफसरों के सम्बन्ध में शिकायतों की जांच चल रही है, जब माननीय उच्च न्यायलय में कई फर्जी मुठभेड़ आदि मामले लंबित है, जब सार्केगुडा मामले के जांच आयोग की सुनवाई चल रही है; तब ऐसे मामलों में ग्रामीणों की ओर से उपस्थित होने वाले वकीलों या मानव अधिकार हनन की शिकायतकर्ता के बारे में इस प्रकार का घिनौना, अपराधिक और धमकी पूर्ण बयान देना निश्चित ही पेशेवर आचरण नहीं है और वास्तव में पद और प्रभाव का दुरूपयोग है. यह भारतीय दंड विधान के अंतर्गत अपराध है. ऐसा विवादित बयान वरिष्ट अधिकारी श्री कल्लूरी और श्री दाश की उपस्थिति में किया जाना, जबकि मानव अधिकार हनन की शिकायतों के आधार पर ही श्री कल्लूरी को बस्तर आई जी के पद से हटाया गया था, कार्यकर्ताओं की शिकायतों और शंकाओं को और भी पुष्ट करता है. हम पुलिस महा निर्देशक और छत्तीसगढ़ शासन से मांग करते हैं कि पुलिस अधीक्षक सुकमा इंदिरा कल्याण एलेसेला पर शीघ्र सक्षम कारवाही की जाये. साथ ही इस निजी कार्यक्रम में श्री कल्लूरी व श्री दाश की इस उपस्थिति और एक उद्घाटन कार्यक्रम को राजनैतिक मंच बनाने के उनके आचरण की उच्च स्तरीय जांच की जावे.

डा लखन सिंह अधिवक्ता सुधा भारद्वाज
अध्यक्ष महासचिव